बलिया जनपद को नहीं मिला उसका हक,हकदार बहुत कुछ पाने का : जनपद में एयरपोर्ट,राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय,प्रस्तावित सभी सड़के(बाईपास)और जिला कारागार शीघ्र से शीघ्र बन जाना चाहिए
Ajay Mishra
Wed, Jul 16, 2025
बलिया। धर्म,राजनीति और कर्म सभी में टापर पर अन्ततः फिसड्डी,पीछे कतार में बैठा गदहा विद्यार्थी जैसा ही आंकलन "जनपद बलिया" का होना इस जनपद और जनपद वासियों के साथ अन्याय है।पहले भी हुआ है और लगातार हो रहा है,इधर विकास रुपी सूर्य की हल्की सी किरण दिखाई जरुर दी लेकिन वह किरण धरातल पर पहुंचने से पहले ही कहीं फिर विलुप्त प्राय: हो गई ।
यह विकास रुपी सूर्य की किरण की झलक आप भी कर लें,यह किरण/विकास बलिया का तीसरे दशक में जोर-शोर से बन रहा सिवर के रुप में, बलिया में राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय ( Govt. medical college), कटहल नाला को अतिक्रमण से मुक्त कर इसे सुरहाताल और गंगा नदी के बीच पर्यटन के स्वरुप को दिया जाना आदि हो सकता है।
इसमें कहीं से दो राय नहीं है कि जनपद धर्म, राजनीति व कर्म सबमें सबसे ज्यादा आगे व योगदान देने वाला है,सनातन की बात करें तो वह परीक्षक जिसने ब्रह्मा जी,विष्णु जी और महेश(यानि शंकर जी)की परीक्षा अपने बुद्धि विवेक से लिया था जिसमें विष्णु भगवान को लात(पैर से जोर का)मारने का भी काम किए थे महर्षि भृगु रुपी संत जिनका एक मात्र मन्दिर इसी बलिया जनपद में है जो महर्षि भृगु के प्रायश्चित के क्रम में वो उत्कृष्ट भूमि जिसमें उनका मृगछाला रुपी वस्त्र गिरा था कि आप यही तपस्या करके अपने लात मारने के पापों से मुक्ति पा सकते हैं।
राजनीतिज्ञों की बात करें तो यह योग्यता (मेरिट) भी सनातन या धर्म से जरा भी कम नही है,1857से लेकर 1975 के आपात काल तक फिर,1990 में आरक्षण रुपी ज्वाला में छात्रों के जलने के दौरान सत्ता सम्भालकर देश को शांत कर, 2014 के बाद की राजनीति में भी अपना परचम लहराता रहा है बलिया।
कौन नहीं जानता कि 1857 में अंग्रेजी हुकमरानों की छाती पर गोली दागने वाला वीर जवान मंगल पाण्डेय का बलिदान, फिर देश आजाद होने के 5 साल पहले ही बलिया को आजाद कराने वाले हमारे पूर्वज चित्तू पाण्डेय और महा नन्द मिश्र की अगुवाई में बलिया आजाद होकर देश के आजाद होने वाले उन तीन जनपदों में अपना स्थान बना लिया और बलिया को राष्ट्र भी घोषित कर दिया नाम रखा गया "स्वतंत्र बलिया प्रजातंत्र" ऐसा है हमारा कर्म।
इसके बाद आपात काल के बाद नारा ही लगा था जय प्रकाश का बिगुल बजा है-जाग उठी तरुराई है,'सत्ता छोड़ो जनता आ रही है' के नायक जय प्रकाश नारायण जिनके नेतृत्व में सत्ता परिवर्तन हुआ और कांग्रेस पार्टी को हटा कर सभी दलों के जेल जाने वाले नेताओं की अगुवाई में जनता पार्टी की सरकार बनी और उस सत्ताधारी पार्टी के अध्यक्ष बनें कांग्रेस में ही रहकर जेल जाने वाले एक मात्र नेता चन्द्रशेखर, चन्द्रशेखर जी उस समय भी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों में स्थान ही नहीं रखते थे बल्कि सशक्त दावेदार थे पर अपने अभिभावक जय प्रकाश नारायण को सम्मान देने के कारण उस पद तक नहीं पहुंच सके। पर जब अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 फिसदी आरक्षण लागू हुआ और देश भर में अशांत स्थिति बन गयी,देश जलने लगा, उस विषम परिस्थिति में देश की बागडोर बलिया के हांथ में चन्द्रशेखर के रुप में मिली और देश शांत हुआ जिसमें बलिया के ही जनेश्वर मिश्र रेल मंत्रालय देखने वाले नेता रहे जो बाद में जीवन पर्यन्त समाजवादी पार्टी के बड़े नेता बने रहे।
2014 के बाद की राजनीति में भी क ई सांसद दोनों सदनों से और एक सांसद जो जनपद के ही है राज्यसभा के उपसभापति का पद सुशोभित कर रहे हैं। राज्य सरकार में भी पहले जगन्नाथ चौधरी, काशी नाथ मिश्र,बच्चा पाठक,शिव मंगल सिंह,विक्रमा दित्य पाण्डेय आदि और अब दया शंकर सिंह, दानिश आजाद अंसारी आदि की मेरिट हुए भी,उस हिसाब से बलिया को भी उचित विकास का लाभ व जनपद को प्राप्त है और साहित्यिक जगत से देखें तो हजारी प्रसाद द्विवेदी, परशुराम चतुर्वेदी,डां केदार नाथ सिंह आदि अनेको साहित्यकार व चोटी के पत्रकार बलिया से हैं,गणितज्ञ गणेषी प्रसाद भी बलिया के ही रहे हैं। फिर भी जो मिलना चाहिए,वह नहीं मिला।जनपद को हवाई सुविधा से भी जोड़ा जाना चाहिए। इसके लिए बसपा के एक मात्र विधायक उमा शंकर सिंह ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को पत्र लिख दिया है,अब यहाँ एक एयरपोर्ट बन जाना चाहिए।
इसके साथ ही जितना शीघ्र हो राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय का निर्माण,सिवर का,जिला कारागार और प्रस्तावित सड़कों का तथा कटहल नाला कोअतिक्रमण मुक्त करके पर्यटन का स्वरुप दिया जाना चाहिए तथा रेलवे स्टेशन का नाम बदल कर बलिया की जगह "बागी बलिया" किया जाना चाहिए।
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