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नया कानून पीछे से लागू नहीं होता है,देश के शिक्षकों पर टेट थोपा गया : दशकों से नौकरी करने वालों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा आज थोपा जा रहा है जो असंवैधानिक है,इसे शिक्षक नहीं मानेंगे

बलिया। उत्तर प्रदेश में और पूरे देश में सरकारों द्वारा बेसिक शिक्षकों के साथ अन्याय किया जा रहा है। बेसिक शिक्षा परिषद की नियमावली को दरकिनार कर असंवैधानिक व अनैतिक आदेश थोपे जा रहे हैं।

बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों तथा इनके सहायता प्राप्त‌ विद्यालयों में मृतक आश्रित शिक्षक भी हैं जिनमें से कुछ ऐसे शिक्षक भी हैं जो‌

टेट(शिक्षक पात्रता परीक्षा) में बैठने की ही योग्यता नहीं रखते तो वे पास कैसे करेंगे?

भारतीय जनता‌ पार्टी की सरकार‌ ने RTE कानून लागू कर शिक्षकों की पात्रता की शर्त TET कर दी। यह कानून 27 अगस्त 2009 से प्रभावी किया गया और मूर्तरूप में 25 अगस्त‌ 2010 से

लागू कर दिया गया। लेकिन 25 अगस्त‌ 2010 के पूर्व के नियुक्त शिक्षकों पर जो पात्र होने पर नियुक्ति पा चुके हैं उन पर प्रभावी होने का‌ कहीं कोई मतलब नहीं है। पहले के शिक्षकों पर प्रभावी नहीं करने का प्राविधान भी इस कानून में किया गया है। इसे उत्तर प्रदेश में भी लागू किया गया और वर्ष 2011 से अबतक टेट पास शिक्षकों की ही नियुक्ति होती रही।

सबसे हैरतंगेज मामला तब बना जब सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला‌ सुनाया कि यह पहले के शिक्षकों पर भी लागू होगा और 2 साल के अन्दर TET करना होगा। सरकार‌ ने एक नियम 2017 में बनाया कि 4 वर्षों में सभी को न्यूनतम अहर्ता हासिल करनी होगी। जिसे राज्य शासन ने संज्ञान नहीं लिया और ‌इसी पर सर्वोच्च ‌न्यायालय ने यह सख्त निर्णय लिया है कि सभी को टेट करना होगा। यह माननीय न्यायालय ‌का आदेश सरकार द्वारा पूरी बात बताए बगैर मुगालफे में न्यायालय ‌को रखकर कराया गया‌ है जो पूरी तरह अनैतिक और असंवैधानिक है।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक‌ संघ के प्रान्तीय अध्यक्ष डां०दिनेश चन्द्र शर्मा ने देश के प्रधानमंत्री और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री को ज्ञापन‌ भेंज कर पहले के नियुक्त शिक्षकों पर यह कानून लागू न करने की मांग करते हुए उन लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षित करने का अनुरोध ‌किया है जिनकी सेवा कानून के अस्तित्व में आने से दशकों या कई दशक पहले से चल रही है।

इसी मांग को लेकर 16 सितम्बर दिन मंगलवार को प्राथमिक शिक्षकों का एक विशाल प्रदर्शन के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन‌ जिलाधिकारी के जरिए दिया जायेगा।

सभी शिक्षकों से जिलाध्यक्ष बलिया जितेन्द्र सिंह

ने अपील किया है कि सभी शिक्षक जिलाधिकारी के कार्यालय पर पहुंचकर ज्ञापन देने में अपनी सख्या बढ़ा कर अपनी मांगो को बुलन्द करें और जीवन-मरण तथा रोजी-रोटी के इस संकट को दूर करने में अपनी भूमिका का निर्वहन करें।

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