कोटेदारों को उनका कमीशन नहीं मिल रहा है जिससे उनका जीवन यापन मुश्किल : नहीं मिला कमीशन तो कोटेदार आत्महत्या करने के लिए होंगे मजबूर
Ajay Mishra
Mon, Aug 4, 2025
पत्रकार जितेंद्र यादव (जीतू )
बलिया। अपने हक की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है। वर्षों से सार्वजनिक वितरण प्रणाली की रीढ़ माने जाने वाले कोटेदार अब खुद ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। लगातार कमीशन न मिलने से परेशान होकर बलिया जिले के सभी कोटेदारों ने कई बार हड़ताल भी किया है। लेकिन कोई ना कोई बहाना करके हडताल तुड़वा लिया जाता है एक हफ्ते बाद 10 दिन बाद आपका कमीशन आ जाएगा आधार में कुछ गड़बड़ है तो बैंक पासबुक में कुछ गड़बड़ है ऐसे पेपर हमेशा गडबड़ ही रहता है सिर्फ दिन दिन दिया जाता है लेकिन कमीशन नहीं आता है
जिला अध्यक्ष आनंद सिंह, के नेतृत्व में सभी कोटेदार बंधुओं ने यह निर्णय लिया है कि 15 अगस्त तक कमीशन नहीं आता है तो हम सब आत्मा दाह करने पर मजबूर होंगे।
कोटेदार संघ का कहना है कि वे वर्षों से शासन की नीतियों को जमीन पर लागू करते आ रहे हैं, आम जनता तक राशन पहुंचाने का कार्य कठिन परिस्थितियों में भी ईमानदारी से निभाया है, लेकिन बदले में उन्हें उनके परिश्रम का न्यायसंगत प्रतिफल – यानी कमीशन – समय पर नहीं मिल रहा है।
जिला अध्यक्ष आनंद सिंह ने भावुक होकर कहा:
"हम कोटेदारों को कोई राहत नहीं, कोई सम्मान नहीं। एक-एक दाने का हिसाब देने वाले हम लोग खुद अपने घर चलाने में असमर्थ हो रहे हैं। क्या हमारा परिश्रम, हमारी सेवा का कोई मूल्य नहीं है?"
हड़ताल का उद्देश्य केवल विरोध नहीं, बल्कि शासन तक कोटेदारों की आवाज़ पहुंचाना है ताकि उन्हें उनका हक, सम्मान और समय पर भुगतान मिल सके। संघ ने साफ किया है कि यदि प्रशासन ने इस बार भी अनदेखी की, तो उसके जिम्मेदार शासन प्रशासन होगी
तहसील अध्यक्ष दिनेश राय ने कहा:
"यह लड़ाई सिर्फ कमीशन की नहीं है, यह लड़ाई हमारे आत्मसम्मान की है। हमारी चुप्पी को अब कमजोरी न समझा जाए।"
कोटेदार संघ ने समस्त उचित दर विक्रेताओं से अपील की है कि इस आंदोलन में एकजुट रहें और अपनी आवाज़ को मजबूती से उठाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों को इस अपमान का सामना न करना पड़े।
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